स्पष्टता न्यूज
कोलकाता। ममता बनर्जी को कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने नया ऑफर दिया है। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के खत्म होने के बाद ममता की पार्टी में ज्यादा कुछ बचा नहीं है। ऐसे में उन्हें कांग्रेस में शामिल हो जाना चाहिए। पार्टी उनके नेतृत्व में बंगाल में काम करने के लिए तैयार है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले और बाद के हालात ममता बनर्जी के लिए काफी बदल गए हैं। कभी कांग्रेस पार्टी को ठेंगा दिखाने वाली ममता बनर्जी अब इंडिया गठबंधन की बैठक में हिस्सा ले रही हैं और विपक्षी एकता की बात कर रही हैं। इसी बीच कांग्रेस की तरफ से भी ममता बनर्जी पर हल्का तंज कसा गया है। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने गुरुवार को पूर्व पश्चिम बंगाल को पार्टी सहित कांग्रेस में शामिल होने का ऑफर दे डाला। उन्होंने कहा कि राज्य में किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी की जरूरत नहीं है। वह अपने सांसदों और नेताओं के साथ कांग्रेस में दोबारा आ सकती है। पार्टी पश्चिम बंगाल में उनका नेतृत्व स्वीकार करने के लिए तैयार है।
लोकसभा चुनाव 2024 में अपनी हार के लिए ममता बनर्जी को जिम्मेदार मानने वाले अधीर रंजन चौधरी ने यह बयान ऐसे समय में दिया है, जब ममता अपने राजनीतिक जीवन के सबसे उथल-पुथल बारे दौर से गुजर रही हैं। उनके हाथ से राज्य की सत्ता जा चुकी है। वहीं पार्टी से भी हाथ धोना पड़ा है। बनर्जी के इन्हीं हालातों पर बात करते हुए अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में ज्यादा कुछ नहीं बचा है। उन्होंने कहा, “पश्चिम बंगाल में दूसरी पार्टी की जरूरत नहीं है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद टीएमसी में भी ज्यादा कुछ बाकी नहीं है। हम ममता बनर्जी से आग्रह करते हैं कि वह अपने बचे हुए सांसदों और विधायकों के साथ कांग्रेस में शामिल हो जाएं। हम उनके नेतृत्व में पश्चिम बंगाल में काम करने के लिए तैयार हैं।”
अधीर रंजन चौधरी की तरफ से दिए गए विलय के बयान पर ममता बनर्जी गुट की तरफ से सांसद सौगत राय ने बयान दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी ऐसे विलय के मुद्दे पर तभी विचार करेगी, जब इसे कांग्रेस की प्रमुख लीडरशिप की तरफ से उठाया जाएगा। उन्होंने कहा, “उन्होंने (चौधरी ने) वही कहा, जो उन्हें लगा। हम इस बारे में कुछ नहीं कहना चाहते। तृणमूल कांग्रेस एक अलग पार्टी है। अगर कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर एक आधिकारिक प्रस्ताव बनाकर आती है, तो पार्टी इस मुद्दे पर विचार करेगी। तृणमूल कांग्रेस (ममता) इस समय इंडिया गठबंधन का हिस्सा है।”
बता दें, ममता बनर्जी पहले कांग्रेस का ही हिस्सा थीं। लेकिन 1998 में पार्टी से अलग होकर उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की। इस पार्टी के द्वारा उन्होंने न सिर्फ कांग्रेस बल्कि पश्चिम बंगाल में तीन दशक पुराने वामपंथ के शासन को भी चुनौती दी। 2011 के विधानसभा चुनाव के दौरान ममता ने बंगाल की सत्ता हासिल कर ली और लगातार 15 साल तक राज किया।
