सुप्रीम कोर्ट बोला : तृणमूल के बैंक अकाउंट्स फ्रीज रहेंगे कलकत्ता हाईकोर्ट जल्द सुनवाई करे

स्पष्टता न्यूज

कोलकाता। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस को उन चार बैंक अकाउंट्स को ऑपरेट करने की इजाजत देने से इनकार कर दिया, जिन्हें पश्चिम बंगाल पुलिस ने साइबर क्राइम की शिकायत के सिलसिले में फ्रीज कर दिया था। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने कहा- चुनाव आयोग ने तृणमूल का चुनाव चिह्न फ्रीज कर दिया है। खातों में मौजूद फंड का असली हकदार कौन है, इस मामले पर कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है। इसलिए हम इस मामले की सुनवाई नहीं करेंगे।


4 मई को पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजे आए थे। टीएमसी 15 साल बाद राज्य की सत्ता से बाहर हो गई थी। पार्टी को 294 में से सिर्फ 77 सीटों पर जीत मिली थी। इसके बाद पार्टी के 58 विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में अलग गुट बना लिया था।


याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए सीनियर एडव्होकेट एएम सिंहवी ने कहा कि बैंक खातों को फ्रीज करना पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों को रोकने की कोशिश है। इससे पार्टी की गतिविधियां ठप्प हो गई हैं। उन्होंने कहा कि आगामी उपचुनावों आदि को देखते हुए पार्टी के खर्चों के लिए हर महीने कम से कम 12.15 करोड़ रुपए की आवश्यकता है। टीएमसी जैसी बड़ी पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों के लिए यह न्यूनतम राशि है। इसलिए इन अकाउंट्स को अनफ्रीज किया जाए। राज्य सरकार की ओर से पेश हुए मेहता ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि दो गुट खुद को असली तृणमूल बता रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को यह तय करने को कहा है कि असली पार्टी कौन सी है। उन्होंने कहा- दूसरा गुट भी कह रहा है कि हमें खाता चलाने की अनुमति दी जाए। इसलिए उन्हें असली तृणमूल पर फैसले का इंतजार करना चाहिए। मेहता ने कहा- हमें पता चला है कि तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस के महासचिव के निजी सचिव ने खाते में 35 करोड़ रुपए नकद जमा किए थे। पिछली सरकार के समय, वह सरकारी जमीनों को निजी जमीनों में कन्वर्ट कर बेचता था। इसी तरह से यह धन जमा किया गया था, जिसकी जांच चल रही है।

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