जलझूलनी एकादशी पर वैदिक रीति से मना नितिन आर्य का जन्मदिन
10 दिवसीय संस्कृत सम्भाषण शिविर का भी हो रहा है सफल आयोजन, 20 लोगों ने लिया हिस्सा
स्पष्टता न्यूज
कोलकाता। पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण के बीच अब समाज धीरे-धीरे अपनी सनातन जड़ों और वैदिक परंपराओं की ओर लौटने लगा है। इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण जलझूलनी एकादशी के पावन अवसर पर देखने को मिला, जब नितिन आर्य का जन्मदिन मोमबत्ती बुझाकर या केक काटकर नहीं, बल्कि पूर्णतः भारतीय परंपरा के अनुसार दीप प्रज्वलित कर और संस्कृत मंत्रोच्चार के साथ मनाया गया।
इस अवसर पर अपने विचार साझा करते हुए नितिन आर्य ने कहा कि आजकल की पीढ़ी ‘तिथि’ के अनुसार जन्मोत्सव मनाना भूल गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तारीख के बजाय भारतीय पंचांग की ‘तिथि’ के अनुसार जन्मदिन मनाने से उस विशेष समय और कालखंड के सभी सकारात्मक ग्रहों और नक्षत्रों का लाभ व्यक्ति को मिलता है। उन्होंने कहा, “हम किसी पद्धति का विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि हम अपनी उस पुरानी और वैज्ञानिक पद्धति को पुनर्जीवित करना चाहते हैं जिसमें दीप जलाकर, एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाकर और संस्कृत श्लोकों के साथ जन्मोत्सव मनाया जाता है।”
कार्यक्रम में उपस्थित शैलेश कुमार बागड़ी ने ‘भारतीय संस्कृति संवर्धन समिति’ की इस पहल पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सनातन संस्कृति में दीपक जलाना शुभ माना गया है और दीप बुझाना अशुभ। उन्होंने बताया कि किस तरह गुलामी के कालखंड में अंग्रेजों ने हमारी संस्कृति को विपरीत दिशा में मोड़ दिया था। लेकिन अब समाज में जागरूकता आ रही है और लोग अपने बच्चों का जन्मदिन शुभता के प्रतीक ‘दीप प्रज्वलन’ के साथ मना रहे हैं। शैलेश जी ने संस्कृत मंत्रों की शक्ति का उल्लेख करते हुए इसे ब्रह्मांड की ‘कोडिंग’ के समान बताया, जिसमें असीम ऊर्जा छिपी है।
जन्मदिन समारोह के साथ-साथ यहाँ 10 दिवसीय संस्कृत कक्षा (संस्कृत सम्भाषण शिविर) का भी आयोजन चल रहा है। देवभाषा संस्कृत को सीखने और आम बोलचाल में उसे अपनाने के लिए लोगों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। इस 10 दिवसीय शिविर के लिए समाज के विभिन्न वर्गों से 20 लोगों ने अपना नाम पंजीकृत कराया है, जो नियमित रूप से संस्कृत सीख रहे हैं। संस्कृत कक्षा के प्रतिभागियों में सत्यप्रकाश राय (बबलू जी), शैलेश कुमार बागड़ी, नितिन आर्य, महेश केडिया, राजू लाठ, यश बिनानी, प्रीति सेठिया, सुरेश साव, जतिन सेवक, पवन राठी ,करिश्मा खन्ना, मनीषा जायसवाल, संदीप जैन, पायल मंडल, पूनम गोंड, सत्य प्रकाश पांडेय, नीरज पांडेय, सौरव सकताल, मुकेश सेठ, महेश मूंधड़ा शामिल हैं। आयोजकों का मानना है कि अपनी सभ्यता और संस्कृति को सहेजने के लिए किए जा रहे इन छोटे-छोटे प्रयासों से ही भविष्य में भारत का गौरवशाली नव-रूप पुनः दिखाई देगा। कार्यक्रम का समापन उपस्थित लोगों द्वारा ‘भारत माता की जय’ और ‘सनातन संस्कृति की जय’ के ओजस्वी उद्घोष के साथ हुआ।

