डॉ. पारस कोचर की नई पुस्तक का हुआ विमोचन नाम है संपत्ति का वितरण – ज़िन्दगी से विरासत तक

स्पष्टता न्यूज

कोलकाता। शहर के ईएम बाईपास स्थित ‘सफायर, में जाने-माने लेखक एवं अधिवक्ता डॉ. पारस कोचर की बहुप्रतीक्षित पुस्तक का भव्य विमोचन समारोह आयोजित किया गया। हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में प्रकाशित यह पुस्तक जीवनकाल के दौरान और उसके पश्चात संपत्ति नियोजन तथा विवाद-मुक्त विरासत हस्तांतरण पर केंद्रित है। उनकी नई पुस्तक ‘डिस्ट्रिब्यूशन ऑफ प्रॉपर्टी ड्यूरिंग एंड आफ्टर लाइफटाइम’ यानी ‘संपत्ति का वितरण – ज़िन्दगी से विरासत तक’ के विमोचन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आयकर अन्वेषण विभाग के निदेशक (डीआईटी आईएनवी) कुमार अजीत उपस्थित रहे। वहीं, आईसीएआई के पूर्व अध्यक्ष सीए रंजीत कुमार अग्रवाल ने बतौर विशिष्ट अतिथि कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।


अतिथियों का अभिनंदन एवं सम्मान समारोह की शुरुआत वैदिक परंपरा के अनुरूप सरस्वती वंदना और राष्ट्रगान के साथ हुई। मंच संचालन मनोज बांठिया ने कुशलतापूर्वक किया, जबकि अभिलाषा सुराणा ने मंचस्थ विशिष्ट अतिथियों का औपचारिक परिचय प्रस्तुत कर सभी का स्वागत किया। कार्यक्रम में एस. एम. सुराना ने लेखक डॉ. पारस कोचर सहित अन्य मुख्य अतिथियों का शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया। प्रतीक जैन ने मुख्य अतिथि कुमार अजीत और विशिष्ट अतिथि सीए रंजीत कुमार अग्रवाल को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। वहीं, डॉ. पारस कोचर ने सभी सम्मानित अतिथियों को स्मृति स्वरूप विशेष उपहार भेंट किए।


इस अवसर पर वक्ताओं ने पुस्तक की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जीवनकाल के दौरान और उसके बाद संपत्ति के वितरण तथा वसीयत से जुड़े कानूनी प्रावधानों को सरल भाषा में समझना आज हर परिवार के लिए आवश्यक है। यह पुस्तक कानून, परिवार और विरासत से जुड़े जटिल सवालों का सहज समाधान प्रस्तुत करती है। पवन पाटोदिया ने पुस्तक की गुणवत्ता और इसके व्यावहारिक पहलुओं की सराहना की। इसके बाद मुख्य वक्ताओं ने अपने विचार रखे।


सीए रंजीत कुमार अग्रवाल और श्री कुमार अजीत ने संपत्ति एवं उत्तराधिकार से जुड़े जटिल कानूनी प्रावधानों को सरल प्रश्नोत्तर प्रारूप में प्रस्तुत करने के लेखक के प्रयास को सराहा। अशोक माहेश्वरी ने विचारों के प्रवाह को रेखांकित करते हुए कहा कि “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल माध्यम चाहे जितना आगे बढ़ जाएं, मुद्रित पुस्तकों की महिमा और प्रासंगिकता कभी कम नहीं हो सकती।” रश्मि ग्रुप के संजीव पटवारी ने कहा कि यह पुस्तक हर वर्ग के लिए उपयोगी साबित होगी। उन्होंने कहा, “परिवार और व्यापारिक उद्योगों को विवादों से बचाकर कैसे सुरक्षित रखा जाए, यह पुस्तक उसका व्यावहारिक मार्ग दिखाती है।”


अधिवक्ता डॉ. पारस कोचर ने स्पष्टता न्यूज से कहा कि यह पुस्तक हर आदमी को पढ़नी चाहिए। इसलिए नहीं कि मेरी पुस्तक की बिक्री हो, बल्कि इसलिए कि लोगों में जागरूकता नहीं है, चाहे वह गरीब हो या पैसे वाला हो। जब व्यक्ति अपनी संपत्ति छोड़ के जाता है, तो उसके वारिसों में झगड़ा होता है। लेकिन यह किताब पढ़ने के बाद अपनी प्रॉपर्टी का सही मैनेजमेंट लोग कर पायेंगे और कोई झगड़ा नहीं होगा। इस पुस्तक से बहुत सी भ्रांतियां दूर हो जाएँगी। मान लीजिए वसीयत है, लोग यह सोचते हैं कि ‘मैं विल कर जाऊँगा… मान लो मैं 20 साल तक नहीं मरा, आज विल कर दिया तो मेरी प्रॉपर्टी मेरे बच्चे ले लेंगे’—ऐसी बात नहीं है। जीवनकाल के दौरान विल महज़ एक कागज़ का टुकड़ा है। खाली विल करने से कुछ नहीं होता है, आदमी जब मर जाता है, तब विल की वैल्यू होती है।


रंजीत अग्रवाल ने कहा कि “प्रॉपर्टी डिस्प्यूट, सक्सेशन प्लानिंग, प्रोबेट, डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ प्रॉपर्टी, जेनरेशनल चेंज- इन सब मुद्दों पर एक कंपोजिट बुक मार्केट में नहीं है। और पारस जी इतने जानकार हैं, कि उन्होंने सारी चीजों को समाहित करके एक किताब लिखी है। मैं समझता हूँ कि यह क्लाइंट्स के साथ-साथ प्रोफेशनल्स के भी पुस्तक बहुत काम आएगी।


राकेश धानीवाल ने कहा कि यह पारस जी की तीसरी किताब है और जिसमें उन्होंने विल व डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ प्रॉपर्टी का, जिंदगी के साथ भी और जिंदगी के बाद भी- जैसे मसलों पर बहुत ही सुंदर शैली में लिखा है। पवन पाटोदिया ने कहा कि देखिए, पारस कोचर जी बुद्धिजीवी इंसान हैं। उनकी किताब में 600 क्वेश्चन-आंसर्स हैं। पारस जी खुद एक बहुत बढ़िया बिजनेसमैन हैं। उन्होंने प्रीफेस में पहले ही लिख दिया है कि अगर आपके कोई क्वेश्चन हों, तो हमें लिख के भेज दीजिए, हम अगली बुक में कवर कर लेंगे। कार्यक्रम के दौरान जॉर्ज ऑरवेल के इस विचार को भी प्रमुखता से रेखांकित किया गया कि ‘पुस्तकें जीवन की अच्छी चीजों को जीवित रखने का एक जरिया हैं।’


इस अवसर पर कॉस्मिक ग्रुप के आदित्य विक्रम बिड़ला, एस. एम. सुराना, नीलिमा जोशी, मिराज शाह, सीए माधव सुरेका तथा लेखक के भाई नरेंद्र कोचर सहित शहर के प्रबुद्ध चार्टर्ड अकाउंटेंट, अधिवक्ता और जाने-माने उद्योगपति बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। समारोह के अंत में अनुपम बैद ने सभी अतिथियों, आयोजकों एवं आगंतुकों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन (वोट ऑफ थैंक्स) प्रस्तुत किया, जिसके उपरांत सभी दोपहर के भोज में शामिल हुए।

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