स्पष्टता न्यूज
श्रीहरि सत्संग समिति एवं वनबंधु परिषद (कोलकाता चैप्टर) के संयुक्त तत्वावधान में रविवार, 27 सितंबर को एक भव्य संगीतमय सामूहिक सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया। यह धार्मिक अनुष्ठान समिति के संस्थापक अध्यक्ष स्व. साधुराम जी बंसल की पावन स्मृति को समर्पित था।

कार्यक्रम का आयोजन श्री सीताराम सत्संग समिति के सानिध्य में तपसिया स्थित ओजस बैंक्वेट हॉल (तीसरी मंजिल) में दोपहर 2:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक संपन्न हुआ। यह समिति द्वारा आयोजित 2026वां संगीतमय सामूहिक सुंदरकांड पाठ था। कार्यक्रम में काफी बड़ी संख्या में धर्म प्रेमियों ने सपरिवार उपस्थित प्रभु श्रीराम की भक्ति रस का पान किया। काफी भव्य दरबार सजा था। पूरे ओजस बैंक्विट में उत्सव का माहौल था। महानगर से काफी संख्या में लोग पहुंचे थे। सर्वप्रथम सज्जन बंसल और उनकी पत्नी मीरा बंसल ने दरबार में पूजन किया।

सज्जन बंसल के बाबूजी का आज जन्मदिन और पुण्यतिथि भी थी। इस मौके पर सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया। मालूम हो कि हर संडे को यह संस्था आयोजन करवाती है मौके पर सज्जन बंसल, प्रवीण अग्रवाल श्री हरि सत्संग समिति अध्यक्ष, महेंद्र अग्रवाल, अध्यक्ष बन बंधु परिषद, विकास पोद्दार, मनोज चेतानी, बुलाकी दास मिमानी, नीरज हाड़ोदिया, सुभाष मुरारका, नटवर बंग, दिलीप चौधरी, विद्यासागर मंत्री, प्रदीप रावलवासिया, ओम प्रकाश डोकानिया, प्रमोद गुप्ता, हेमराज अग्रवाल, नितिन सिंघी, अनुराग गुप्ता, महेश भुवालका, उर्वशी रुस्तगी सहित कई गणमान्य लोग पाठ में शामिल थे। अंत में भव्य आरती हुई।

सज्जन बंसल ने कहा कि बाबूजी के बताए गए रास्ते पर हम चल रहे हैं और आज उनके कृपा से ही सब कुछ हो पा रहा है। सुभाष मुरारका ने कहा कि श्री सत्संग समिति की टीम के द्वारा श्री हरि सत्संग समिति एवं वन बंधु के कोलकाता चैप्टर के तरफ से यह आयोजन हुआ।
वनबंधु परिषद के अध्यक्ष महेंद्र अग्रवाल ने कहा कि यह सीताराम सत्संग समिति का 2026वां सत्संग था, जिसमें सारे लोग प्रोफेशनल हैं, उसके बाद भी समय निकाल के हर संडे को कहीं ना कहीं सत्संग करते हैं और अपनी सेवा देते हैं। हमारा आज सौभाग्य है कि हरि सत्संग समिति और वनबंधु परिषद के साथ हमें आपके साथ जुड़ने का मौका मिला। उन्होंने बताया कि वनबंधु परिषद की स्थापना 1989 में हुई। उन्होंने एक वाकया बताया कि हमारे संस्थापक साधुराम का आज जन्मोत्सव भी है और स्मृति दिवस भी है। मैं सज्जन जी का एक पॉडकास्ट सुन रहा था। मालूम चला कि जब बाबूजी भी समाज के कार्यों में पूरे जुड़े हुए थे, तो जब यह समाज के कार्यों में कहीं झारखंड वगैरह कोई गांव में घूमे, आज से 38 साल पहले, गांवों की क्या दशा होगी, आप समझ सकते हैं।
श्री अग्रवाल ने बताया कि झारखंड के ग्रामीण इलाकों की स्थिति देखकर बाबूजी अत्यंत भावुक हुए थे और उन्होंने सज्जन जी को वहां का दौरा करने को प्रेरित किया। उस दौरे के बाद सज्जन जी ने अपना जीवन तन-मन-धन से ग्रामीण व वनवासी उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। साधुराम जी संस्थापक के साथ-साथ हमारे मार्गदर्शक भी हैं और पूरे भारतवर्ष में हर जगह अब अपना समय देते हैं।”
अपने संबोधन में वनबंधु परिषद और एकल अभियान के ऐतिहासिक सफर का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 1989 में महज 30–40 विद्यालयों से शुरू हुआ यह सफर आज वटवृक्ष बन चुका है। वर्तमान में एकल अभियान के तहत 85,000 से अधिक विद्यालय संचालित हो रहे हैं।

