1 अक्तूबर से बदल जायेंगे एलपीजी ईकेवाईसी, बैंक एफडी और टीडीएस जुड़े नए नियम

स्पष्टता न्यूज

नई दिल्ली। 1 अक्तूबर 2026 से आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी और वित्तीय लेनदेन से जुड़े कई महत्वपूर्ण नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। नए महीने की शुरुआत के साथ ही एलपीजी गैस सिलेंडर की डिलीवरी, बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) की ब्याज दरें, एनआरआई से प्रॉपर्टी खरीद पर टीडीएस नियम और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के पंजीकरण शुल्क से जुड़े दिशानिर्देश प्रभावी हो रहे हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) और संबंधित विभागों द्वारा जारी ये नए नियम ग्राहकों के लिए पारदर्शिता बढ़ाने, वित्तीय धोखाधड़ी रोकने और कर अनुपालन को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से लागू किए जा रहे हैं।


रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए 1 अक्तूबर से डिलीवरी और सब्सिडी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने हेतु दो मुख्य सुरक्षा मानक लागू हो रहे हैं।
अनिवार्य बायोमेट्रिक ईकेवाईसी: सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी रीफिल प्राप्त करने के लिए उन उपभोक्ताओं के लिए बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन या ई-केवाईसी पूरा करना अनिवार्य होगा, जिन्होंने अब तक इसे पूरा नहीं किया है।


ओटीपी आधारित डिलीवरी: एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी के समय अब केवल कागजी रसीद दिखाना काफी नहीं होगा। ग्राहकों को अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर पर प्राप्त वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) सत्यापन के बाद ही सिलेंडर की डिलीवरी मिलेगी। इसका मुख्य उद्देश्य एलपीजी सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकना है।


बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) में पैसे जमा करने वाले ग्राहकों और बड़े निवेशकों के लिए आरबीआई ने ब्याज दरों में पारदर्शिता लाने हेतु नए नियम तय किए हैं।
सभी शाखाओं में समान ब्याज दर: बैंकों के लिए अब अनिवार्य होगा कि वे एक ही तारीख को बुक की गई समान जमा राशि के लिए अपनी सभी शाखाओं में एक समान ब्याज दर की पेशकश करें।


बल्क डिपॉजिट में पारदर्शिता: बड़े डिपॉजिट यानी बल्क डिपॉजिट पर दी जाने वाली ब्याज दरों का खुलासा बैंकों को प्रतिदिन सुबह 10:00 बजे तक अपनी आधिकारिक वेबसाइटों पर अनिवार्य रूप से करना होगा।


यदि आप किसी अनिवासी भारतीय (एनआरआई) से अचल संपत्ति खरीद रहे हैं, तो 1 अक्तूबर से टैक्स कटौती और रिपोर्टिंग के नियम अधिक सख्त कर दिए गए हैं।


फॉर्म 141 फाइलिंग: गैर-निवासी भारतीयों से संपत्ति खरीदने वाले भारतीय निवासी व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ) के लिए अब ‘फॉर्म 141’ दाखिल करना अनिवार्य होगा।


शेड्यूल ई में ब्योरा: इस फॉर्म के साथ एक नया ‘शेड्यूल E’ जोड़ना होगा, जिसमें संपत्ति बिक्री पर हुए पूंजीगत लाभ, काटे गए टीडीएस और भुगतान से जुड़ी पूरी जानकारी विस्तार से दर्ज करनी होगी। 1 अक्तूबर से जन्म और मृत्यु पंजीकरण में देरी करने पर नियमों को काफी सख्त कर दिया जाएगा।


21 दिन की समय सीमा: मानक 21 दिनों की विंडो के बाद देरी से कराए जाने वाले पंजीकरणों पर कड़ा जुर्माना ढांचा लागू किया गया है।
सख्त प्रशासनिक मंजूरी: 21 दिन की अवधि बीत जाने के बाद लेट रजिस्ट्रेशन कराने के लिए अब हलफनामा जमा करना होगा। इसके साथ ही देरी की अवधि के आधार पर तहसीलदार, जिला रजिस्ट्रार, एसडीएम या जिलाधिकारी से औपचारिक प्रशासनिक मंजूरी प्राप्त करना अनिवार्य होगा।

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