स्पष्टता न्यूज
नयी दिल्ली। रक्षा सचिव राजेश कुमार ने कहा है कि भारत इस समय मिसाइल और ड्रोन निर्माण के क्षेत्र में यूक्रेन से कहीं पीछे है। यूक्रेन की एक कंपनी महीने भर में 100 मिसाइलें और 1000 ड्रोन बना देती है, जबकि हम साल भर में 200 से 300 मिसाइलें बना पाते हैं।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित किया कि आगामी कोई भी युद्ध या संघर्ष हवाई ही होगा। यूक्रेन और ईरान का युद्ध की भी इसके उदाहरण रहे हैं। ऐसे में भारत इस मोर्चे पर खुद को कैसे तैयार कर रहा है। इसके लेकर रक्षा सचिव राजेश कुमार ने अपनी बात रखी। उन्होंने भारत की रक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मिसाइलों और ड्रोन टेक्नोलॉजी को निजी क्षेत्र में भेजे जाने के फैसले का भी समर्थन किया। न्यूज 18 के कार्यक्रम में रक्षा पर बात करते हुए राजेश कुमार ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की रक्षा जरूरतों में बदलाव हुआ है।
इसके अलावा अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों ने भी संकेत दिए हैं देश की जरूरतों के लिए हमें अपने उत्पादन को बढ़ाना होगा। रक्षा सचिव ने यूक्रेन का उदाहरण देते हुए कहा कि उस देश की एक कंपनी एक साल में भारत से ज्यादा मिसाइलें और ड्रोन्स का निर्माण करती है। यह हमारे लिए चिंता की बात है। उन्होंने कहा, “यूक्रेन की एक कंपनी हर महीने 100 मिसाइलें और 1,000 ड्रोन बना सकती है। हम ऐसी स्थिति में हैं, जिससे काम नहीं चल सकता है। हम पूरे साल भर में केवल 200 से 300 मिसाइलें ही बना पाते हैं। यह काफी नहीं है। इसलिए हम अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।” हालांकि, आपको बता दें यूक्रेन पिछले लगभग 5 सालों से युद्ध में उलझा हुआ है। ऐसे में उसकी ड्रोन और मिसाइल निर्माण क्षमता में जबरदस्त वृद्धि हुई है। राजेश कुमार ने कहा कि देश में वर्तमान में एक मिसाइल निर्माता कंपनी (भारत डायनामिक्स) है। हम हमेशा केवल उसी पर निर्भर नहीं रह सकते। बता दें, भारत सरकार ने हाल ही में अपनी मिसाइल टेक्नोलॉजी को प्राइवेट सेक्टर के लिए खोल दिया था। इसका कुछ जगहों पर विरोध भी देखने को मिला था।
