महाराष्ट्र के नागपुर में RSS के विजयादशमी समारोह में अपने भाषण के दौरान कहा कि ‘कुछ बुरी ताकतें भारत में सत्ता परिवर्तन लाने की कोशिश कर रही हैं।’

स्पष्टता न्यूज़

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अन्य देशों के उदाहरण देते हुए दावा किया है कि ‘कुछ बुरी ताकतें भारत में सत्ता परिवर्तन लाने की कोशिश कर रही हैं।’
संघ प्रमुख का आरोप है कि भारत की प्रगति को रोक पाने में नाकाम रहने के बाद, ये बुरी ताकतें अब देश को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं। भागवत ने कहा, “भारत उनका निशाना है, क्योंकि यह लगातार प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है।”

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने आरोप लगाया है कि ‘दुष्ट शक्तियां’ भारत में ‘सत्ता परिवर्तन’ लाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि ये कोशिशें सफल नहीं होंगी। भागवत के शब्दों में, “ऐसा (सत्ता परिवर्तन) न तो अतीत में हुआ है और न ही भविष्य में होगा।”

महाराष्ट्र के नागपुर में RSS के विजयादशमी समारोह में अपने भाषण के दौरान, संघ प्रमुख ने आरोप लगाया कि भारत की प्रगति को रोक पाने में असमर्थ रहने के बाद, कुछ बुरी ताकतें देश को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं। भागवत ने कहा, “भारत उनका निशाना इसलिए है क्योंकि यह तरक्की के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। इन बुरी ताकतों को यह समझ आ गया है कि पिछले कुछ दशकों में भारत ने जो अहम नीतियां अपनाई हैं, उनके चलते वे भारत की इस गति को बाधित नहीं कर सकतीं। इसलिए, वे भारत और संघ, दोनों को ही तोड़ने की कोशिश कर रही हैं।”

भागवत ने भारत में अस्थिरता पैदा करने की कोशिशों का आरोप लगाते हुए अन्य देशों के उदाहरण भी दिए हैं। उनका दावा है कि कई वैश्विक शक्तियां भारत की हार चाहती हैं, हालांकि उन्होंने किसी खास देश या संस्था का नाम नहीं लिया। फ्रांस, नेपाल और बांग्लादेश में सरकारों के खिलाफ हाल ही में हुए सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए, आरएसएस प्रमुख ने कहा, “पश्चिम से एक तूफान आ रहा है—एक ऐसा तूफान, जिसके मन में हमारी संस्कृति, स्थापित व्यवस्थाओं और सुरक्षा के प्रति नफरत है। यह तूफान तबाही लाना चाहता है।”
भागवत का दावा है कि कुछ लोग अपने निजी स्वार्थों को साधने के लिए दुनिया भर के अलग-अलग देशों में इस तरह की ‘अराजकता’ फैला रहे हैं।

भागवत आगे कहते हैं कि कुछ बुरी ताकतें भारत, हिंदुओं और संघ को नष्ट करने की साजिश रच रही हैं और उसी के अनुसार काम कर रही हैं। संघ प्रमुख का यह भी कहना है कि सत्ता की चाह रखने वाले और समझदारी की कमी वाले कुछ महत्वाकांक्षी नेता इसमें शामिल हैं। हालांकि, भागवत लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन की जरूरत को भी मानते हैं। वे कहते हैं, “अगर समस्याएं पैदा होंगी, तो विरोध-प्रदर्शन तो होंगे ही।”

Related posts

Leave a Comment